उस लड़की की बात कुछ और है,
जिसका आखिरी नाम कौर है।
उसका डिपार्टमेंट दायीं ओर है,
साइकिल पर उधर ही देखने की होड़ है।
यहीं पास मे एक मोड़ है,
जहां हमने की एक बात गौर है।
पहले तो लगा कि संयोग है,
पर वो आती वहां रोज है।
उसे अपने साथ सोचा हर ठौर है,
और, ख्याली पुलाव पकाए बेजोड़ है।
दोस्तों ने तो हमारे नाम दिए जोड़ है,
और चाय पे उसकी चर्चा घनघोर है।
एक तो इनकी आवाज बहुत ज़ोर है,
देखते नहीं की आसपास कोई और है।
बात फैल ना जाए इसका हमे खौफ है,
क्योंकि अकेला हमे ही थोड़ी ना शौक है?
कहीं ऐसा ना हो, कि गली गली मे शोर है,
वो कौन है जिसका आखिरी नाम कौर है?
बात करना चाहूँ , पर दिल कमजोर है,
कईयों के दिल जो उसने दिए तोड़ है।
फिर भी, एक स्पर्धा सी उसकी ओर है,
जैसे कि कोई दौड़ है।
एक खिंचाव सी उसकी ओर है,
जैसे कि कोई डोर है।
पर हम कहाँ और वो कहीं और है,
हम शाम और वो तो जैसे भोर है।
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