Saturday, May 4, 2024

जो रहा वृक्ष के समान खड़ा

आंधियां जब तेज़ चले,
वृक्ष बन तुम हो खड़े।
हो जड़े इतनी मजबूत,
हो रण छोड़ने को नामंजूर।

मत सोच की तूफान है क्यूँ,
कि मैं कब तक खड़ा रहूँ यूँ।
तू इसे अपनी पहचान बना,
जो रहा वृक्ष के समान खड़ा।

कुछ फूल खुशि के झड़ जाएंगे,
कलियाँ आशा के बिखर जाएंगे। 
लेकिन होगा ना कोई तूफान बड़ा,
जो तू रहा वृक्ष के समान खड़ा। 

विश्वास की शाखाएं होंगी ढुलमुल, 
भाग्य की रेखाएं करेंगी व्याकुल।
लेकिन दिखेगा कोई रास्ता नया,
जो तू रहा वृक्ष के समान खड़ा ।

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