Saturday, May 4, 2024

जिसका आखिरी नाम कौर है

उस लड़की की बात कुछ और है,
जिसका आखिरी नाम कौर है।
उसका डिपार्टमेंट दायीं ओर है,
साइकिल पर उधर ही देखने की होड़ है।
यहीं पास मे एक मोड़ है, 
जहां हमने की एक बात गौर है। 
पहले तो लगा कि संयोग है, 
पर वो आती वहां रोज है।
उसे अपने साथ सोचा हर ठौर है, 
और, ख्याली पुलाव पकाए बेजोड़ है।
दोस्तों ने तो हमारे नाम दिए जोड़ है, 
और चाय पे उसकी चर्चा घनघोर है।
एक तो इनकी आवाज बहुत ज़ोर है, 
देखते नहीं की आसपास कोई और है। 
बात फैल ना जाए इसका हमे खौफ है,
क्योंकि अकेला हमे ही थोड़ी ना शौक है? 
कहीं ऐसा ना हो, कि गली गली मे शोर है, 
वो कौन है जिसका आखिरी नाम कौर है? 

बात करना चाहूँ , पर दिल कमजोर है, 
कईयों के दिल जो उसने दिए तोड़ है। 
फिर भी, एक स्पर्धा सी उसकी ओर है, 
जैसे कि कोई दौड़ है।
एक खिंचाव सी उसकी ओर है, 
जैसे कि कोई डोर है। 
पर हम कहाँ और वो कहीं और है, 
हम शाम और वो तो जैसे भोर है।

बचपना

एक बात मैं कहता सच्चा हूं,
की आज मैं फिर वही बच्चा हूं।
जिसे लगता है कि वो कुछ खास है,
 और सभी चाहने वाले उसके पास है।
जो संसार के नियमों से अनजान है, 
आखिर यही तो उसकी पहचान है। 
जो गलती कर बैठता है,
जिसके पिता कान ऐठता है।
जिसे ना जीवन मे उद्देश्य की तलाश है,
ना खुद से कुछ बड़ा करने की आश है।
जिसे ना भविष्य की परवाह है, 
ना रक्त मे बेवजह जोश का प्रवाह है। 
जो नये के तरफ आकर्षित है, 
जो बदलाव के प्रति हर्षित है। 
जिसे ज़माना नासमझ कहता है, 
जो बराबर उनकी उपेक्षा सहता है।
पर वाकई मे वो बस कौतूहल है, 
उसकी अज्ञानता का यही तो हल है।
इसलिए प्रश्न पूछ कर परेशान करता है, 
जिसके लिए ज़माना उसे शैतान कहता है। 
लेकिन ज़माना तो पक्षपात से पूर्ण होता है, 
और सोच का दायरा भी संकीर्ण होता है।
बचपना तो दुनिया के लिए आस है, 
उसे नए ढंग से देखने का प्रयास है।